नशामुक्ति दिवस पर सैंकड़ों एनसीसी कैडेटों ने श्रीमुख से स्वीकार किया संकल्प
मानव जीवन के लिए अत्यावश्यक-हवा, जल व अन्न : युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमण
शांतिदूत की मंगल सन्निधि में पहुंचे भारत सरकार के कानून एवं न्याय राज्यमंत्री श्री अर्जुनराम मेघवाल
चतुर्मास व्यवस्था समिति ने भूमि का योगदान देने वालों को किया सम्मानित
05.10.2024, शनिवार, वेसु, सूरत (गुजरात) :
डायमण्ड सिटि व सिल्क सिटि सूरत को आध्यात्मिक नगरी के रूप में स्थापित कर रहे जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशमाधिशास्ता, युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी की मंगल सन्निधि में प्रतिदिन हजारों की संख्या में श्रद्धालु की भारी भीड़ उमड़ रही है तो दूसरी ओर आए दिन कोई न कोई विशिष्ट व्यक्तित्व भी आचार्यश्री के दर्शनार्थ उपस्थित होते हैं। गुजरात के राज्यपाल, मुख्यमंत्री, गृहमंत्री, शिक्षामंत्री, भारत के जलशक्ति मंत्री आदि-आदि अनेक विशिष्ट लोगों के साथ अनेक संप्रदायों के सर्वोच्च गुुरु भी उपस्थित हो रहे हैं। इनकी उपस्थिति इस चतुर्मास प्रवास को और अधिक वैशिष्ट्य प्रदान कर रही है। नवरात्र के आध्यात्मिक अनुष्ठान व अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह के दौरान शनिवार को शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमणजी की मंगल सन्निधि में भारत सरकार के कानून एवं न्याय तथा संसदीय कार्य राज्यमंत्री तथा जैन विश्व भारती मान्य विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री अर्जुनराम मेघवाल भी उपस्थित हुए। उन्होंने आचार्यश्री के दर्शन किया। साथ आचार्यश्री की मंगल सन्निधि में आज एनसीसी के सैंकड़ों कैडेट भी अपने मेजर के साथ उपस्थित हुए और आचार्यश्री से नशामुक्ति का संकल्प स्वीकार किया।
नित्य की भांति शनिवार को महावीर समवसरण में युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी का मंगल पदार्पण हुआ। आचार्यश्री ने चतुर्विध धर्मसंघ को आध्यात्मिक अनुष्ठान के अंतर्गत मंत्रों का जप कराया। लगभग आधे घंटे के इस क्रम में मानों पूरा महावीर समवसरण एक तपोस्थली की भांति प्रतीत हो रही थी।
उपस्थित जनता को ‘आयारो’ आगम के माध्यम से युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी ने पावन पाथेय प्रदान करते हुए कहा कि आदमी के जीवन में भोजन का भी महत्त्व होता है। शरीर को टिकाए रखने के लिए हवा, पानी और भोजन भी चाहिए। यह जीवन की प्रथम कोटि की आवश्यकताएं हैं। इन तीनों में पहला स्थान हवा का है, दूसरा स्थान जल का और तीसरा स्थान भोजन का है। भोजन किए बिना तो कितने तपस्वी महीने-दो महीने से भी अधिक समय तक रह जाते हैं तो उनका जीवन चलता रहता है। आहार के बिना तो कई महीनों तक मानव जिंदा रह सकता है। जल मानों मानव जीवन के लिए ज्यादा जरूरी है। पानी के बिना ज्यादा लम्बे समय तक जीवित रहना कठिन है। पानी से ज्यादा महत्त्वपूर्ण हवा होती है। हवा न हो तो आदमी श्वास नहीं ले तो कुछ ही मिनट में मृत्यु को प्राप्त हो सकता है। प्रथम कोटि की आवश्यकताओं में हवा उत्कृष्ट, पानी मध्यम और भोजन जघन्य रूप की आवश्यकता होती है। दूसरे कोटि की आवश्यकताओं में देखें तो तन ढकने के कपड़ा और रहने के लिए मकान की आवश्यकता होती है। कितने दिगम्बर मुनि और अन्य परंपराओं के कितने मुनि बिना वस्त्रों के जीवन जीते हैं। मकान नहीं होता है तो भी फुटपाथ और वृक्षों के नीचे रहकर भी जीवन चलाया जा सकता है।
तीसरे कोटि की आवश्यकता में शिक्षा और चिकित्सा होती है। इस प्रकार जीवन की इन आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए मानव कई बार चिंतित हो सकता है और दुःखी भी हो सकते हैं। आयारो में बताया गया कि जो वीर होते हैं, वो रूखा-सुखा खाकर भी जीवित रह जाते हैं। आदमी को भोजन चाहिए, सात्विक भोजन की आवश्कता है, किन्तु कई बार आदमी ऐसी चीजों को खा लेता है, जो जीवन को नुक्सान पहुंचाने वाली होती हैं। जैसे मानव जीवन के लिए जल कितना आवश्यक है, लेकिन आदमी शराब पीने लग जाता है। शराब, गुटखा, सिगरेट, बीड़ी आदि जो शरीर के लिए अहितकर होती है, उसका आसेवन करने लगता है। शाकाहार से काम चलता है तो फिर भोजन मासांहार क्यों शामिल किया जाए। जैन परंपरा में नॉनवेज को निषेध किया गया है। जीवन में नशामुक्ति की बात भी है। अणुव्रत आन्दोलन का एक सूत्र है नशामुक्ति। आचार्यश्री तुलसी ने अणुव्रत आन्दोलन का शुभारम्भ किया था।
। आचार्यश्री ने समुपस्थित एन.सी.सी. के कैडेटों को प्रेरणा देते हुए ड्रग्स और ड्रिंकिंग न करने प्रतिज्ञा करने का आह्वान किया तो एन.सी.सी. के कैडेटों ने सहर्ष संकल्प स्वीकार किया।
अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह का पांचवा दिन नशामुक्ति दिवस के रूप में समायोजित हुआ। श्री राजेश सुराणा ने अपनी भावाभिव्यक्ति दी। एन.सी.सी. की मेजर अरुधंति शाह ने अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए कहा कि आज के अवसर पर मैं आचार्यश्री महाश्रमणजी को प्रणाम करती हूं। नशामुक्ति आज के समय की सबसे बड़ी समस्या है। जैन धर्म को वैज्ञानिक धर्म माना गया है। यहां पर मानव जीवन के विभिन्न समस्याओं का समाधान हो सकता है। आज दुनिया डेटा में फंस गयी है तो उसे सप्ताह में एक दिन डेटा का भी उपवास करे, ऐसा प्रयास होना चाहिए।
एलिवेट के कार्य से जुड़े मुनि अभिजितकुमारजी ने अपनी विचाराभिव्यक्ति दी। अणुव्रत समिति-सूरत के अध्यक्ष श्री विमल लोढ़ा ने अपनी अभिव्यक्ति दी। उपस्थित जनता को आज के अवसर पर साध्वीप्रमुखाजी ने भी उद्बोधित किया।
आचार्यश्री की मंगल सन्निधि में चतुर्मास प्रवास व्यवस्था समिति-सूरत की ओर से चतुर्मास के लिए स्थान प्रदान करने वाले वालों को सम्मानित करने का उपक्रम रहा, जिसमें भगवान महावीर युनिवर्सिटि परिवार, श्री विट्ठलभाई परेवियार परिवार, श्री राजेश-तनसुख आहिर परिवार, श्री किरणभाई पटेल परिवार, श्री मोहनभाई छिवंका भाई पटेल परिवार, श्री जयप्रकाश खानचंदजी आसवानी परिवार, श्री शंकरलाल मारवाड़ी परिवार, श्री जीवन केवलभाई पटेल परिवार, श्री रविन्द्रभाई पटेल परिवार, श्री मनीष, महेन्द्र, मुकुल देसाई परिवार, श्री मोहनभाई मोंजानी परिवार, श्री संजयभाई पटेल परिवार, श्री विनीत रणजीतसिंह सुराणा, श्री हिरणभाई देसाई परिवार, श्री अमितभाई देसाई परिवार, श्री दिवेश, मनहर परमार परिवार, चीफ फायर आफिसर श्री बसंतभाई पारिख, जोन आफिसर अठवा जोन श्रीमती मिताबेन गांधी परिवार, भाजपा-सूरत के महामंत्री श्री किशोर बिंदल को सम्मानित किया गया। इस संदर्भ में आचार्यश्री ने पावन आशीर्वाद प्रदान किया। इस कार्यक्रम का संचालन चतुर्मास प्रवास व्यवस्था समिति के महामंत्री श्री नानालाल राठौड़ ने किया।

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